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आंत्रिक शांति के बिना गरीब होता है मनुष्य - वैदिक सागर

आंत्रिक शांति के बिना गरीब होता है मनुष्य - वैदिक सागर  एक राजा के दरबार में कोई आम ले आया। राजा ने कभी आम नहीं खाया था इसलिए उसने पूछा, "यह क्या है" जो व्यक्ति आम लाया था, उसने कहा, "महाराज ! यह आम है। यह बहुत ही अच्छा फल है, आप इसे खाकर देखिए।" राजा ने कहा, "मुझें नहीं खाना है। मेरे दरबार में जो लोग बैठे हैं इन्हें खिलाओ। ये लोग खाकर मुझे बताएंगे कि ये आम कैसा फल है? "राजा ने अपने प्रधान को आम दिया और उसे खाने के लिए कहा । उसने खाया और कहा, "महाराज यह तो बहुत बढ़िया" है। यह नरम है, मीठा है और इसमें रस भी है। राजा ने कहा, "अब भी मुझे समझ में नहीं आया।" आखिर दरबार में एक अन्य विद्वान सज्जन को आम दिया गया ताकि वह खाकर राजा को उसके चारे में सटीक जानकारी दे सके मगर वह खाने की बजाय आम को काटकर सीधे राजा के पास ले आए और कहा, "राजन इसे आप खाइए। जब तक आप नहीं खाएंगे तब तक दूसरों के खाने से आपको कुछ पता नहीं लगेगा कि यह क्या चीज है। यह व्यक्तिगत अनुभव की बात है। "राजा आम को चखता है और चखने के बाद कहता है, "ह...

मृत्यु के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य - वैदिक सागर

मृत्यु  के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य मरने के उपरांत 47 दिन बाद आत्मा पहुंचती है यमलोक, आइये जाने क्या - क्या होता है रास्ते में मृत्यु एक ऐसा सच है जिसे कोई भी झुठला नहीं सकता। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद स्वर्ग-नरक की मान्यता है। पुराणों के अनुसार जो मनुष्य अच्छे कर्म करता है, वह स्वर्ग जाता है,जबकि जो मनुष्य जीवन भर बुरे कामों में लगा रहता है, उसे यमदूत नरक में ले जाते हैं। सबसे पहले जीवात्मा को यमलोक लेजाया जाता है। वहां यमराज उसके पापों के अनुसार उसे सजा देते हैं। मृत्यु के बाद जीव - आत्मा यमलोक तक किस प्रकार जाती है, इसका विस्तृत वर्णन गरुड़ पुराण में है। गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार मनुष्य के प्राण निकलते हैं और किस प्रकार प्रेत का रूप लेता है। गरुड़ पुराण के अनुसार जिस मनुष्य की मृत्यु होने वाली होती है, वह बोल नहीं पाता है। अंत समय में उसमें दिव्य दृष्टि उत्पन्न होती है और वह संपूर्ण संसार को एकरूप समझने लगता है। उसकी सभी इंद्रियां नष्ट हो जाती हैं। वह जड़ अवस्था में आ जाता है, यानी हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है। इसके बाद उस...

अलसी के औषधीय व आयुर्वेदिक गुण - वैदिक सागर

अलसी के औषधीय व आयुर्वेदिक गुण - वैदिक सागर अलसी के औषधीय व आयुर्वेदिक गुण - वैदिक सागर हाई ब्लड प्रैशर को कट्रोल में रखेगी अलसी  हाई ब्लड प्रैशर यानी हाइपरटेंशन की समस्या आजकल लोगों में आम हो गई है । अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल होने का खतरा भी रहता है । इसे कंट्रोल में रखने के लिए लोग दवा का सेवन करते हैं लेकिन एक चम्मच अलसी के बीजों से भी आप इसे कंट्रोल कर सकते हैं । आपको बताते हैं हाई ब्लड प्रैशर में कैसे फायदेमंद हैं अलसी के बीज। सुपरफूड है अलसी  जंक फूड, शराब, धूम्रपान जैसी चीजों से दूर रहकर आप हाई बी पी. के जोखिम को कम कर सकते हैं । मगर अलसी एक ऐसा सुपरफूड भी है जो हाई ब्लड प्रैशर को हमेशा कंट्रोल में रखेगा । औषधीय गुणों से भरपूर अलसी को कई बीमारियों का रामबाण इलाज माना जाता है।  बी. पी. कंट्रोल करने के लिए कैसे करें अलसी का सेवन आप इसे भूनकर या पानी में भिगोकर खा सकते हैं। आप चाहें तो इसे पीसकर इसका पाऊडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं । इसके अलावा दूध में अलसी के चीज डालकर पीने से भी फायदा होगा।...

पुरुष का श्रृंगार तो स्वयं प्रकृति ने किया है..

पुरुष का श्रृंगार तो स्वयं प्रकृति ने किया है.. स्त्रियाँ काँच का टुकड़ा हैं..जो मेकअप की रौशनी पड़ने पर ही चमकती हैं.. किन्तु पुरुष हीरा है जो अँधेरे में भी चमकता है और उसे मेकअप की कोई आवश्यकता नहीं होती। खूबसूरत मोर होता है मोरनी नहीं.. मोर रंग - बिरंगा और हरे - नीले रंग से सुशोभित..जबकि मोरनी काली सफ़ेद.. मोर के पंख होते हैं इसीलिए उन्हें मोरपंख कहते हैं..मोरनी के पंख नहीं होते.. दांत हाथी के होते हैं,हथिनी के नहीं। हांथी के दांत बेशकीमती होते हैं। नर हाथी मादा हाथी के मुकाबले बहुत खूबसूरत होता है। कस्तूरी नर हिरन में पायी जाती है। मादा हिरन में नहीं। नर हिरन मादा हिरन के मुकाबले बहुत सुन्दर होता है। मणि नाग के पास होती है ,नागिन के पास नहीं। नागिन ऐसे नागों की दीवानी होती है जिनके पास मणि होती है। रत्न महासागर में पाये जाते हैं, नदियो में नहीं..और अंत में नदियों को उसी महासागर में गिरना पड़ता है। संसार के बेशकीमती तत्व इस प्रकृति ने पुरुषों को सौंपे.. प्रकृति ने पुरुष के साथ अन्याय नहीं किया.. 9 महीने स्त्री के गर्भ में रहने के बावजूद भी औलाद का चेहर...

भगवान को ये लोग हैं सबसे प्यारे - हिंदी प्रेरणादायक कहानी - वैदिक सागर

भगवान को ये लोग हैं सबसे प्यारे, जानें क्या आप हैं उन में शामिल एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में लगा देता था। यहां तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवद्-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था। एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण करने के लिए जा रहा था कि उसे एक देव के दर्शन हुए। राजा ने देव को प्रणाम करते हुए उनका अभिनन्दन किया और देव के हाथों में एक लम्बी-चौड़ी पुस्तक देखकर उनसे पूछा,‘‘महाराज, आपके हाथ में यह क्या है?’’ देव बोले,‘‘राजन! यह हमारा बहीखाता है, जिसमें सभी भजन करने वालों के नाम हैं।’’ राजा ने निराशायुक्त भाव से कहा,‘‘कृपया देखिए तो इस पुस्तक में कहीं मेरा नाम भी है या नहीं?’’ देव महाराज किताब का एक-एक पृष्ठ उलटने लगे, परन्तु राजा का नाम कहीं भी नजर नहीं आया। राजा ने देव को चिंतित देखकर कहा,‘‘महाराज ! आप चिंतित न हों, आपके ढूंढने में कोई भी कमी नहीं है। वास्तव में यह मेरा दुर्भाग्य है कि मैं भजन-कीर्तन के लिए समय नहीं निकाल पाता, और इसीलिए मेरा नाम...

मनुष्य का मन एक हाथी जैसा - वैदिक सागर

मनुष्य का मन एक हाथी जैसा - भगवान् को बार-बार याद करो एक हाथी है उसे नहला धुला कर छोड़ दो तब फिर वह क्या करेगा ? मिट्टी में खेलेगा और अपने शरीर को फिर गन्दा कर लेगा, कोई उस पर बैठे तो उसका शरीर भी गन्दा अवश्य होगा । लेकिन यदि हाथी को स्नान कराने के बाद पक्के बाड़े में बाँध दिया जाये ?-तब फिर हाथी अपना शरीर गन्दा नहीं कर सकेगा । मनुष्य का मन भी हाथी के समान है एक बार ध्यान साधन और भगवान् के भजन से वह शुद्ध हो गया तो उसे स्वतन्त्र नहीं कर देना चाहिये । इस संसार में पवित्रता भी है, मन का स्वभाव है वह गन्दगी में जायेगा और मनुष्य देह को दूषित करने से नहीं चूकेगा इसलिये उसे गन्दगी से बचाये रखने के लिये एक बाड़े की जरूरत होती है जिसमें वह घिरा रहे । गन्दगी की सम्भावनाओं वाले स्थानों में न जा सके । ईश्वर का भजन उसका निरन्तर ध्यान एक बाड़ा है जिसमें मन को बन्द रखा जाना चाहिये, तभी साँसारिक संसर्ग से उत्पन्न दोष और मलिनता से बचाव सम्भव है। भगवान् को बार-बार याद करते रहोगे तो मन अस्थायी सुखों के आकर्षण और पाप से बचा रहेगा और अपने जीवन के स्थायी लक्ष्य की याद बनी रहेगी । उस समय दूषित...

हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान - वैदिक सागर

हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान! हिंदू संस्कृति किसी अंधविश्वास पर नहीं बल्कि विज्ञान की ठोस धरातल पर बनी है, जिस पर लाखों लोग विश्वास करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। इस संस्कृति में सांस लेने, खाने, बैठने और खड़े होने जैसी सामान्य बातों समेत जीवन का हर पहलू एक आध्यात्मिक प्रक्रिया के तौर पर विकसित हुआ। इंसान की परम प्रकृति को यहां बड़े व्यापक तरीके से खोजा गया है। हालांकि दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारी संस्कृति से संबंधित काफी कुछ खो चुका है। वास्तव में हम उसे सुरक्षित ही नहीं रख पाए, लेकिन फिर भी यह एक जीती जागती संस्कृति है। इसी संस्कृति कि उन परंपराओं को जानेगें और उनके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जिसे आम लोग नहीं जानते हैं, आज उस पर से पर्दा उठाएंगे। जरुर पढे़ यह लेख... 1. नदी में सिक्के फेंकना : हम लोग यह हमेशा से ही सुनते आ रहें हैं, कि बहती नदी में सिक्के डालने से हमे सौभाग्य प्राप्त होगा। लेकिन इसका एक वैज्ञानिक कारण है, पहले जब सिक्के बनाये जाते थे तो वे तांबे के होते थे जो कि हमारे शरीर के लिए एक बहुत उपयोगी धातु मनी जाती है। लेकिन आज के समय में यह...