Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Health Tips

आँखों की रोशनी बढ़ाने के आसान से नुस्ख़े - वैदिक सागर

आँखों की रोशनी बढ़ाने के आसान से नुस्ख़े - वैदिक सागर आँखों की रोशनी कम होने के कई लक्षण होते हैं जैसे- की धुंधला दिखाई देना, सिर में दर्द रहना, दूर और पास की चीजें देखने मे तकलीफ होना। इनके वजह से चश्मे का इस्तेमाल करना पड़ता है। आगे दिए हुए उपायों को आजमाने से आंखों की रोशनी को तेज करने में मदद मिलेगी और साथ मे चस्मा भी जल्द ही हट जाएगा। चस्मा लगाना तो आज कल का फैशन बन गया है लेकिन जो लोग मजबूरी में चस्मा लगाते हैं उनके लिए तो यह जी का जंजाल ही लगता है। जिन लोगों की आंखों की रोशनी कम हो जाती है केवल वही लोग मजबूरी में चश्मा लगाने का दर्द समझ सकते हैं। कुछ लोग चश्मे की बजाय लैंस का प्रयोग करते हैं परंतु लैंस लगाने के बाद आंखों का और अधिक ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए हम ऐसे नुस्खे बताने जा रहे हैं जिससे न केवल आंखों की रोशनी तेज होगी बल्कि चश्मे से भी जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा। इन नुस्खों का प्रयोग रात को सोने से पहले जरूर करे । आंखों की रोशनी तेज करने के नुस्खे-  1. आंवला आँखों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। आंवले से बने मुरब्बे का प्रतिदिन दो बार सेवन करने से आंखों की रोशनी तेज होती ह...

हरी धनियां के पत्तों के लाभ - वैदिक सागर

हरी धनियां के पत्तों के लाभ - वैदिक सागर भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए, हमें उन खाद्य पदार्थों को लेना चाहिए जो हमारे स्वाद को बढाते हैँ और हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैँ। इसी तरह, धनियां का उपयोग भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। यह स्वाद के साथ भोजन का रं ग भी बदलता है। धनियां की पत्तियों में कईं पोष्टिक तत्व होते हैँ जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करतै हैँ। धनियां पत्ती में विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड हौले हैं जो शरीर को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओँ से बचाने मेँ मदद करते हैं। धनिया में विटामिन A, विटामिन C फास्फोरस जेसे कई एंटींआक्सिडेंट होते हैँ जो दृष्टि हानि को रोकते हैं। इसके साथ ही धनिया आंखो पर पडने वाले खिंचाव को कम करने में मदद करता है। धनिया के पत्तों का सेवन डायरिया, एनीमिया जैसी समस्याओँ से राहत दिलाने में भी सहायक है। धनिया में विटामिन सी, विटामिन के, प्रोटीन, कैल्पिग्यम, याइमिन कैरोटिन और पोटैशियम भी होता है जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। धनिया के पत्तों का सेवन डायरिया, एनीमिया जैसी समस्याओ सै राहत दिलाने में भी सहायक ह...

अलसी के औषधीय व आयुर्वेदिक गुण - वैदिक सागर

अलसी के औषधीय व आयुर्वेदिक गुण - वैदिक सागर अलसी के औषधीय व आयुर्वेदिक गुण - वैदिक सागर हाई ब्लड प्रैशर को कट्रोल में रखेगी अलसी  हाई ब्लड प्रैशर यानी हाइपरटेंशन की समस्या आजकल लोगों में आम हो गई है । अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल होने का खतरा भी रहता है । इसे कंट्रोल में रखने के लिए लोग दवा का सेवन करते हैं लेकिन एक चम्मच अलसी के बीजों से भी आप इसे कंट्रोल कर सकते हैं । आपको बताते हैं हाई ब्लड प्रैशर में कैसे फायदेमंद हैं अलसी के बीज। सुपरफूड है अलसी  जंक फूड, शराब, धूम्रपान जैसी चीजों से दूर रहकर आप हाई बी पी. के जोखिम को कम कर सकते हैं । मगर अलसी एक ऐसा सुपरफूड भी है जो हाई ब्लड प्रैशर को हमेशा कंट्रोल में रखेगा । औषधीय गुणों से भरपूर अलसी को कई बीमारियों का रामबाण इलाज माना जाता है।  बी. पी. कंट्रोल करने के लिए कैसे करें अलसी का सेवन आप इसे भूनकर या पानी में भिगोकर खा सकते हैं। आप चाहें तो इसे पीसकर इसका पाऊडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं । इसके अलावा दूध में अलसी के चीज डालकर पीने से भी फायदा होगा।...

अर्जुन के वृक्ष से लाभ - हेल्थ टिप्स - वैदिक सागर

अर्जुन के वृक्ष से लाभ... - अर्जुन छाल को दूध् में पीसकर मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार मिटता है। - अर्जुन छाल एवं गंगेरण समभाग लेकर व आधा भाग एरण्ड बीज चूर्ण प्रतिदिन प्रातः सांयकाल बकरी के दूध् में डालकर ;लगभग ५ ग्राम चूर्णद्ध पकायें। ठण्डा होने पर विषम मात्राा ;१-३ या ३-१द्ध में घृत मध्ु मिलाकर पिलाने से क्षय रोग मिटता है। - त्वक चूर्ण, अर्जुनत्वक चूर्ण एवं चावलों का चूर्ण सेवन करने से कुष्ठ में लाभ होता है व समस्त प्रकार के त्वचागत रोग मिटते है। - भृंगराज एवं अर्जुनक्षार दही के पानी के साथ सेवन करने से संग्रहणी में लाभ होता है। - उडद के आटे में अर्जुन छाल चूर्ण मिलाकर घृत में सेंक कर भैंस के दूध् में पकाकर सेवन करने से भस्मक तीक्ष्णाग्निद्ध मिटती है। - २ ग्राम अर्जुन त्वक चूर्ण, २ ग्राम कडुवा इन्द्र जौ चूर्ण मिलाकर शीतल जल से सेवन करने से तीव्र अतिसार मिटता है। - अर्जुन छाल ३ ग्राम, गुलाब जल १५ मिली, द्राक्षरिष्ट या मृ(कासव १५ मिली की मात्रा से प्रतिदिन भोजन के पश्चात यदि गर्भवती स्त्राी सेवन करें तो उसे बहुत सुंदर सन्तान की प्राप्ति होती है, ऐसा स्वयं...

गिलोय बेल जो 70 रोगों को जड़ से मिटाती है - हेल्थ टिप्स - वैदिक सागर

ये गिलोय एक प्रकार की बेल  है जो 70 रोगों को जड़ से मिटाती है, ये आसानी से गाँव मे मिल जाती है । गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है। गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिल...

प्याज़ के कुछ सरल औषधीय प्रयोग - वैदिक सागर

प्याज़ के कुछ सरल औषधीय प्रयोग - वैदिक सागर  १- यदि जी मिचला रहा हो तो प्याज़ काटकर उसपर थोड़ा काला - नमक व थोड़ा सेंधा -नमक डालकर खाएँ , लाभ होगा | २-पेट में अफ़ारा होने पर दिन में तीन बार निम्न औषधि का प्रयोग किया जा सकता है - प्याज़ का रस -२० ml ; काला -नमक -१ ग्राम व हींग -१/४ ग्राम लें ,इन सबको मिलाकर रोगी को पिलाएँ | ३-हिचकी की समस्या होने पर १० ग्राम प्याज़ के रस में थोड़ा सा काला - नमक व सेंधा -नमक  मिलकर लेने से लाभ होता है | ४- प्रातःकाल उठकर खाली पेट १ चम्मच प्याज़ का रस पीने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है | ५- यदि किसी के चेहरे पर काले दाग़ हों तो उनपर प्याज़ का रस लगाने से कालापन दूर होता है तथा  चेहरे की चमक भी बढ़ती है |

हमेशा काम आने वाले 51 नुस्खे - वैदिक सागर

हमेशा काम आने वाले 51 नुस्खे हमारे जीवन में रोगों का प्रभाव पड़ता ही रहता है -हम छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज स्वयं कर सकते है आज हम आप के लिए लाये हैं साधारण छोटे-छोटे प्रयोग जिनको आप अवश्य अपनाए कुछ प्रयोग नीचे दिए गए है जो आपके घर में ही उपलब्ध है अजमाए और लाभ ले – 1.दमे के लिये तुलसी और वासा:- दमे के रोगियों को तुलसी की १० पत्तियों के साथ वासा (अडूसा या वासक) का २५० मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। लगभग २१ दिनों तक सुबह यह काढ़ा पीने से आराम आ जाता है- 2.मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक:- सेंधा नमक की लगभग 5 ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है। नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है- 3.बैठे हुए गले के लिये मुलेठी का चूर्ण:- मुलेठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर खाने से बैठा ह...