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Shree Hanuman Chalisa - Vaidik Sagar | श्री हनुमान चालीसा - वैदिक सागर

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भगवान को ये लोग हैं सबसे प्यारे - हिंदी प्रेरणादायक कहानी - वैदिक सागर

भगवान को ये लोग हैं सबसे प्यारे, जानें क्या आप हैं उन में शामिल एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में लगा देता था। यहां तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवद्-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था। एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण करने के लिए जा रहा था कि उसे एक देव के दर्शन हुए। राजा ने देव को प्रणाम करते हुए उनका अभिनन्दन किया और देव के हाथों में एक लम्बी-चौड़ी पुस्तक देखकर उनसे पूछा,‘‘महाराज, आपके हाथ में यह क्या है?’’ देव बोले,‘‘राजन! यह हमारा बहीखाता है, जिसमें सभी भजन करने वालों के नाम हैं।’’ राजा ने निराशायुक्त भाव से कहा,‘‘कृपया देखिए तो इस पुस्तक में कहीं मेरा नाम भी है या नहीं?’’ देव महाराज किताब का एक-एक पृष्ठ उलटने लगे, परन्तु राजा का नाम कहीं भी नजर नहीं आया। राजा ने देव को चिंतित देखकर कहा,‘‘महाराज ! आप चिंतित न हों, आपके ढूंढने में कोई भी कमी नहीं है। वास्तव में यह मेरा दुर्भाग्य है कि मैं भजन-कीर्तन के लिए समय नहीं निकाल पाता, और इसीलिए मेरा नाम...

मनुष्य का मन एक हाथी जैसा - वैदिक सागर

मनुष्य का मन एक हाथी जैसा - भगवान् को बार-बार याद करो एक हाथी है उसे नहला धुला कर छोड़ दो तब फिर वह क्या करेगा ? मिट्टी में खेलेगा और अपने शरीर को फिर गन्दा कर लेगा, कोई उस पर बैठे तो उसका शरीर भी गन्दा अवश्य होगा । लेकिन यदि हाथी को स्नान कराने के बाद पक्के बाड़े में बाँध दिया जाये ?-तब फिर हाथी अपना शरीर गन्दा नहीं कर सकेगा । मनुष्य का मन भी हाथी के समान है एक बार ध्यान साधन और भगवान् के भजन से वह शुद्ध हो गया तो उसे स्वतन्त्र नहीं कर देना चाहिये । इस संसार में पवित्रता भी है, मन का स्वभाव है वह गन्दगी में जायेगा और मनुष्य देह को दूषित करने से नहीं चूकेगा इसलिये उसे गन्दगी से बचाये रखने के लिये एक बाड़े की जरूरत होती है जिसमें वह घिरा रहे । गन्दगी की सम्भावनाओं वाले स्थानों में न जा सके । ईश्वर का भजन उसका निरन्तर ध्यान एक बाड़ा है जिसमें मन को बन्द रखा जाना चाहिये, तभी साँसारिक संसर्ग से उत्पन्न दोष और मलिनता से बचाव सम्भव है। भगवान् को बार-बार याद करते रहोगे तो मन अस्थायी सुखों के आकर्षण और पाप से बचा रहेगा और अपने जीवन के स्थायी लक्ष्य की याद बनी रहेगी । उस समय दूषित...

हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान - वैदिक सागर

हिंदू परंपराओं के पीछे छुपा हुआ है ये विज्ञान! हिंदू संस्कृति किसी अंधविश्वास पर नहीं बल्कि विज्ञान की ठोस धरातल पर बनी है, जिस पर लाखों लोग विश्वास करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। इस संस्कृति में सांस लेने, खाने, बैठने और खड़े होने जैसी सामान्य बातों समेत जीवन का हर पहलू एक आध्यात्मिक प्रक्रिया के तौर पर विकसित हुआ। इंसान की परम प्रकृति को यहां बड़े व्यापक तरीके से खोजा गया है। हालांकि दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारी संस्कृति से संबंधित काफी कुछ खो चुका है। वास्तव में हम उसे सुरक्षित ही नहीं रख पाए, लेकिन फिर भी यह एक जीती जागती संस्कृति है। इसी संस्कृति कि उन परंपराओं को जानेगें और उनके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जिसे आम लोग नहीं जानते हैं, आज उस पर से पर्दा उठाएंगे। जरुर पढे़ यह लेख... 1. नदी में सिक्के फेंकना : हम लोग यह हमेशा से ही सुनते आ रहें हैं, कि बहती नदी में सिक्के डालने से हमे सौभाग्य प्राप्त होगा। लेकिन इसका एक वैज्ञानिक कारण है, पहले जब सिक्के बनाये जाते थे तो वे तांबे के होते थे जो कि हमारे शरीर के लिए एक बहुत उपयोगी धातु मनी जाती है। लेकिन आज के समय में यह...