Skip to main content

Posts

Showing posts with the label VAASTU TIPS

कछुए के प्रतीक को घर में रखने के कुछ लाभ - वैदिक सागर

कछुए के प्रतीक को घर में रखने के कुछ लाभ - वैदिक सागर कछुए के प्रतीक को घर में रखने के कुछ लाभ - वैदिक सागर → कछुए के प्रतीक को घर में रखने से आर्थिक उन्नति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  → वास्तु और फेंगशुई के अनुसार कछुआ एक प्रभावशाली यंत्र है, जिससे वास्तु दोष का निवारण होकर घर में खुशहाली आती है। → कछुए को शांत तथा मंदगति से चलने वाला दीर्घजीवी प्राणी माना गया है।  → सनातन धर्म के अनुसार कछुए को शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। → कछुए के प्रतीक को कभी भी बेडरूम में नहीं रखना चाहिए।  → कछुए का सर्वोत्तम स्थान ड्राइंग रूम माना गया है।  → हमेशा घर के अंदर की ओर कछुए का मुंह रखना सर्वदा फलदायी है।  → कछुए के संबंध में ऐसी मान्यता है कि कछुए के प्रतीक को घर में रखने से निरंतर आर्थिक उन्नति होती है। loading...

पूजा सम्बन्धित नियम - वैदिक सागर

पूजा सम्बन्धित नियम 1. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है। 2. शिवजी, गणेशजी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए। 3. मां दुर्गा को दूर्वा (एक प्रकार की घास) नहीं चढ़ानी चाहिए। यह गणेशजी को विशेष रूप से अर्पित की जाती है। 4. सूर्य देव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए। 5. तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तोंको तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं। 6. शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं का पूजन दिन में पांच बार करना चाहिए। सुबह 5 से 6 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में पूजन और आरती होनी चाहिए। इसके बाद प्रात: 9 से 10 बजे तक दूसरी बार का पूजन। दोपहर में तीसरी बार पूजन करना चाहिए। इस पूजन के बाद भगवान को शयन करवाना चाहिए। शाम के समय चार-पांच बजे पुन: पूजन और आरती। रात को 8-9 बजे शयन आरती करनी चाह...

कुछ वास्तु टिप्स आप के लिए - वैदिक सागर

कुछ वास्तु टिप्स आप के लिए - वैदिक सागर  १. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं । २. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें | ३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से धन की हानी होती हैं। लक्ष्मी घर से निकल जाती है1 घर मे अशांति होती है1 ४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है। ५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है | ६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है | ७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो | ८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं। ९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में...

सकारात्‍मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए घर में मंदिर का उचित स्‍थान पर होना भी बहुत जरूरी है - वास्तु ज्ञान - वैदिक सागर

पूजा-पाठ से मन को शांति मिलती है लेकिन रोजाना मंदिर जाना मुमकिन नहीं हो पाता. ऐसे में अक्सर लोग घर में ही मंदिर स्थापित करते हैं. सुख शांति और सकारात्‍मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए घर में मंदिर का उचित स्‍थान पर होना भी बहुत जरूरी है. अगर आप शुभ फल पाने की इच्‍छा रखते हैं और अपने घर-परिवार पर प्रभु की कृपा दृष्टि बनाए रखना चाहते हैं तो घर में मंदिर के कुछ जरूरी नियमों और बातों का ध्‍यान जरूर रखें. आइए जानें क्‍या हैं वे जरूरी बातें... 1. वास्‍तु के हिसाब से पूजा घर हमेशा पूर्व या उत्‍तर दिशा में ही होना चाहिए. 2. मंदिर का पश्चिम या दक्षिण दिशा में होना अशुभ फलों का कारण बन सकता है. 3. घर में मंदिर या पूजाघर के ऊपर या आस-पास में शौचालय नहीं होना चाहिए. 4. मंदिर को रसोईघर में बनाना भी वास्‍तु के हिसाब से उचित नहीं माना जाता है. 5. अगर मंदिर में एक ही भगवान की दो तस्‍वीरें हैं तो उन्‍हें आमने-सामने न रखें. 6. भगवान की मूर्तियों को एक-दूसरे से कम से कम 1 इंच की दूरी पर रखें. 7. एक ही घर में कई मंदिर न बनाएं वरना मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है. 8. स...